पिघलता हुआ पहाड़ ।

प्रिय हिमाचल, काफ़ी दिन हो चले हैं और मैं तुमसे दूर कहीं तुम्हें याद कर रही हूँ। आशा करती हूँ तुम अपने जैसे होगे। स्मृतियाँ भी कित...
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इंतज़ार

कुछ पल तो मुझे यूँ प्यारे होते हैं कि बस मन करता है कागज़ पर अपना दिल बिना किसी अलंकार के रख दूँ, और वह पत्र तुम्हारे पते पर भेज दू...
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आज मैं इस दुनिया की

मैंने काफी ढूँढने की कोशिश की थी खुद में खुद को पर मै खुद को न मिली| मैंने काफ़ी सराहने की कोशिश की थी खुद की तराशी हुई किसी कला को...
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