साक्षर हाल बताती हूँ , निषिद्ध जगहों पर जाती हूँ। तिनका तिनका चुनती हूँ , मन का भगवान सजाती हूँ। मन के हारे हार रही थी, मन के जीते जीत गई। इ...
मैं मौन हूँ! तुम सोच रहे होगे कि मैं मौन हूँ तो बोल कैसे रहा हूँ। मैं बता दूँ, कि मैं ही बोलता आया हूँ, हमेशा से। हाँ मुझमे धैर्य बहुत...
एक बात मेरे ज़हन से चल तो देती है, पर होठों पर बैठती नहीं है। जितना भी द्वंद्व हो व्यवहार और सोच में, कभी ऐंठती नही है। वो बात मुझे ...
आज मैं फिर से उन सड़कों से गुज़र रहा हूँ, जो कल गलियाँ होती थीं। जहाँ ढोलक मंजीरों संग रंग रलियाँ होती थीं। मौका भी खुशामद था, पर हर घर ...
दशहरा कल ख़त्म हुआ है, और मैं कहीं घूम नही पाई हूँ। इतने रावण चटके इधर उधर, पर पटाकों पर झूम नही पाई हूँ। पंडालों में न जाने कि...
अरे ऐसा क्या हुआ है आज जो हम कटघरे में खड़े हैं, खुली हवाओं में अमन से फहर रहे थे, आज उस हवा से गिर कर क्यों कचहरी में आ पड़े हैं। ...
तब से, अब तक और तब तक जब तक सब बदल न जाए । जो साँसें चल रही है, उसकी गति मेरी न हो जाए। बस तब तक इनको चलना है, ताकि आख़िर तक इनको त...
अनभिज्ञ और अंजान सी मै , अपना परिचय बतलाती हूँ | कलम उठाकर जान बूझ्बूझ कर, प्रश्न एक उठाती हूँ | मै माँ भी बनी, साथी भी बनी , तेरी ...
तुम्हारे घर की दीवार क्या मेरे घर की दीवारों जैसी हैं? चुप चाप मुझे इधर से उधर चलते देखती हैं, बिलकुल धीर गंभीर सी वह...
काफ़ी दिनों बाद खुद में उतरी हूँ , टूटी , बिखरी और बिखरे अंग से रंग निचुड़ता हुआ। मैं अक्खड़पने में फिरसे जा पहुँचीं...
