कवि सम्मेलन

मैं आज कविजनों के बीच सम्मिलित थी। उस बड़े से आँगन में सब गद्दों पर बैठे थे। मसनद पर किसी ने कुहनी टिका रखी थी तो किसी ने अपना सर। आलम ...
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शहीदी

आज मैं भारत की हवाओं से होकर गुज़रा हूँ, मैं हर भारतवासी के वफ़ाओं से होकर गुज़रा हूँ। मैं तो सुखदेव राजगुरु संग विहार पर निकला था, आज़ाद ...
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साधक

कुछ था जो था मैं वादक शहनाई का। वादन यूँ ही नही आज शुभ कहलाता है। दुल्हन के पल्लू से छन कर मैं उससे मिल कर आता हूँ, यूँही नही हर शादी ...
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ख्वाब

इनायत तो ख़्वाबों में बरसती है जब तुम मिल जाते हो । पर क्योंकि सपने पूरे नही होते,  यह सोच कर हम ख़्वाब को ख़्वाब समझ कर टाल देते ह...
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