Jai Hind!

मुझे यह लिखने के लिए क्षमा किया जाए पर स्वतंत्र भारत के बाध्य और बोझिल हृदय में बैठकर मुझे अपना मौन खटक रहा है।  क्यों खटक रहा है? इतने बुद्...
Read More

क्रंदन की तनया ।

लेखन एक तरह का तिलिस्म है । यह मुझे अब समझ आने लगा है, और आता रहेगा । मैं यह जानती हूँ कि आप सभी लेखन को अलंकृत करना एक महत्वपूर्ण अंग समझते...
Read More

पिघलता हुआ पहाड़ ।

प्रिय हिमाचल, काफ़ी दिन हो चले हैं और मैं तुमसे दूर कहीं तुम्हें याद कर रही हूँ। आशा करती हूँ तुम अपने जैसे होगे। स्मृतियाँ भी कित...
Read More

हाँ! मैं मौन हूँ।

मैं मौन हूँ! तुम सोच रहे होगे कि मैं मौन हूँ तो बोल कैसे रहा हूँ। मैं बता दूँ, कि मैं ही बोलता आया हूँ, हमेशा से। हाँ मुझमे धैर्य बहुत...
Read More