साक्षर हाल बताती हूँ , निषिद्ध जगहों पर जाती हूँ। तिनका तिनका चुनती हूँ , मन का भगवान सजाती हूँ। मन के हारे हार रही थी, मन के जीते जीत गई। इ...
मुझे यह लिखने के लिए क्षमा किया जाए पर स्वतंत्र भारत के बाध्य और बोझिल हृदय में बैठकर मुझे अपना मौन खटक रहा है। क्यों खटक रहा है? इतने बुद्...
लेखन एक तरह का तिलिस्म है । यह मुझे अब समझ आने लगा है, और आता रहेगा । मैं यह जानती हूँ कि आप सभी लेखन को अलंकृत करना एक महत्वपूर्ण अंग समझते...
हाँ, तो मुझे कभी कभी ऐसा लग जाता है कि कोई ये बताना ही नहीं चाहता कि उसे सच में कुछ नहीं आता और वो कितना बेवकूफ़ है। या अच्छे शब्दों में कहो ...
प्रिय हिमाचल, काफ़ी दिन हो चले हैं और मैं तुमसे दूर कहीं तुम्हें याद कर रही हूँ। आशा करती हूँ तुम अपने जैसे होगे। स्मृतियाँ भी कित...
मैं मौन हूँ! तुम सोच रहे होगे कि मैं मौन हूँ तो बोल कैसे रहा हूँ। मैं बता दूँ, कि मैं ही बोलता आया हूँ, हमेशा से। हाँ मुझमे धैर्य बहुत...
